Monthly Archives: February 2010

एक भूमिका – मेरा अमेरिका का सफ़र

मेरा अमेरिका में पड़ाव अब कुछ ही दिनों का शेष है और मैं चाहती हूँ की जितना कुछ मैंने यहाँ सुखद अनुभव किये है उन्हें मैं अलग अलग पोस्ट में बताऊँ। मैंने यहाँ जो अभी अच्छा देखा, सुना, महसूस किया, अपने सारे मीठे अनुभवों को कोशिश करुँगी की शब्दों में पिरो सकू। मैं बात करुँगी, यहाँ के लोगों के बारे में, यहाँ की संस्कृति, शिक्षण, खान-पान, व्यवस्था, मनोरंजन, और भी बहुत कुछ। ये मेरी पहली विदेश यात्रा थी और जितनी भी रही सुखद रही।
मेरी सोच सकारात्मक है, और मैं कोशिश करती हूँ जो भी कुछ सीखूं अच्छा सीखूं, ऐसा सीखूं जो मेरे ज्ञान को और बढ़ाये। भारत में मैंने अमेरिका के बारे में बहुत कुछ सुना था लेकिन सब एक तरीके से बुरा था या कहिये नकारात्मक था। पर मैंने ये तय किया था की मुझे यहाँ से कुछ अच्छा ही ले जाना है और मानिए मैंने यहाँ से बहुत कुछ सीखा। इतनी चीज़ों के बारे में जाना जिनसे में बेखबर थी। बस उन्ही सब सीखों को चाहूंगी के अपने ब्लॉग पर लिख सकू।

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अभी तक हम बच्चों को सिखाते आये हैं, अब कुछ सीख हमारे लिए –

रेवा की डॉक्टर के रूम में एक कोटेशन बोर्ड टंगा है, उसमें लिखी हर बातें मुझे इतनी नेक लगती हैं। मैं जब भी ऑफिस जाती हूँ उससे एक बार ज़रूर पढ़ती हूँ। साधारण और इतने सुन्दर तरीके से सीख लिखीं है की मन किया की आप सब के साथ बांटू –

Be there,
Say Yes as often as possible,
Let them bang pots and pans,
If they are crabby, put them in water,
If they are unlovable, love yourself.
Realize how important it is a child,
Go to a movie theater in your pajamas,
Read Books out loud with joy,
Invent pleasures together,
Remember how really small they are,
Giggle a lot,
Surprise them.
Say no when Necessary,
Teach feelings,
Heal your own inner child,
Learn about parenting,
Hug trees together,
Make loving safe,
Bake a cake and eat without hands,
Plan to build a rocket ship.
Imagine yourself magic,
Make lots of forts with blankets,
Let your angel fly,
Reveal your own dreams,
Search out the positive,
Keep the gleam in your eye,
Mail letters to God.
Encourage silly,
Open up,
Stop yelling,
Express your love a lot,
Speak kindly,
Paint their sports shoes,
Handle with caring.
CHILDREN ARE MIRACULOUS

आजकल ज़िन्दगी

आमिर खुसरो की एक सूफी कविता की कुछ पंक्तियाँ –

आज बसंत मनाले सुहागन, आज बसंत मनाले
अंजन मंजन कर पिया मोरी, लम्बे नेहर लगाले
तू क्या सोवे नींद की मासी,
बंद जागे तेरे भाग सुहागन, आज बसंत मनाले
ऊंची नार के ऊंचे चितवन,
अयसो दियो है बनाए
शाह आमिर तुही देखन को, नैनों से नैना मिलाये,
सुहागुन, आज बसंत मनाले

बीता हफ्ता बहुत ही व्यस्त था। रेवा की सर्दी बढ़ गयी और उससे वो काफी परेशान रही। वो परेशान रही तो हम दोनों भी परेशान रहे। उसकी नाक कफ की वजह से बंद रहती तो वो न साँस ले पाती थी और न दूध पी पाती थी। इस वजह से बहुत ही चिड-चिड़ाने लगी थी। सोचिये सर्दी में हम बड़ों की हालत ख़राब हो जाती है फिर रेवा तो बस ५ महीने की है। डॉक्टर को दिखने ले गए तो उसने हमें कहा की उसकी नाक में नमकीन पानी की कुछ बूँदें डालने को जिससे उसकी नाक में अगर कुछ भी सुखा हो तो वो ढीला हो जाए और उससे वो आसानी से निगल पाए। मुझे बड़ा अजीब लगा क्यूंकि भारत में मैंने ऐसा न सुना और न देखा। लेकिन यकीन मानिए उससे रेवा को बहुत आराम मिला। नमकीन पानी की ६-८ बूँदें बच्चों की नाक में दाल दीजिये उससे उनकी नाक में जो भी कुछ फसा वो गटक लेंगे क्यूंकि उन्हें बाहर निकलना नहीं आता। और इससे उन्हें छींक भी आयेंगी जिससे उनकी नाक खुलने में आसानी होगी। फिर हमारे देसी तरीके तो हमेशा काम आते हैं – सरसों के तेल में लहसुन, हिंग और अज्वैन पका कर उसकी मालिश करने से भी उस बहुत आराम मिला।
इसी दौरान Valentine’s Day भी आया, हमने पहले तय किया था की अगर मौसम ठीक रहा तो पिकनिक मनाएंगे पर रेवा की तबियत की वजह से कहीं नहीं जा पाए। मैंने सोचा था की मौका लगा तो विशाल के लिए कुछ न कुछ खारेदुंगी पर ऐसा हो न सका। फिर मैंने उनके लिए छोटा सा कुछ बनाया –


अब मुझे सब कुछ क्रोचेत क्रोचेत दीखता है 🙂 शायद इसकी वजह से मुझे अपने लिए थोड़ा समय मिल जाता है। सच मानिए मैं आजकल बहुत जल्दी चिड जाती हूँ। सारा दिन अकेले बच्चे के साथ, कोई आस पास बात करने वाला नहीं, बस ब्लॉग और क्रोचेत से ही थोड़ा समय काट लेती हूँ और फ्रेश होने की कोशिश करती हूँ।
आजकल Wake Up Sid का ये गाना मुझे बहुत अच्छा लगता है “आजकल ज़िन्दगी”, आप भी सुनिए –

हाय मेरी नींद !

रेवा को हलकी सर्दी हो गयी है, वैसे सब कुछ ठीक है लेकिन उससे दूध पीना अच्छा नहीं लगता। बहुत रोती है दूध पीने में। २ घंटे के रोने धोने के बाद अब जा कर सोयी है पर अभी भी नींद अच्छे से नहीं आई है उससे। बीच बीच में जा कर फिर सुलाना पड़ता है। सोती भी बस गोदी में है और वो भी खड़े रहो उसे गोदी में ले कर, जहाँ बैठे वैसे ही उसका मचलना शुरु। पता नहीं बच्चों को कैसे पता चलता है की वो गोदी में है की नहीं, और गोदी में ले कर उन्हें खड़े है की नहीं। मेरी दिनचर्या इतनी व्यस्त हो गयी है की दिन ढलते ढलते बहुत थकान हो जाती है और फिर उसपर हलकी ठण्ड में धुप निकल आये तो बस –

नींद ऐसे आँखों में भरती है की पूछिए मत…. आजकल मुझे नींद से बहुत प्यार हो गया। मैंने ज़िन्दगी में इतना नींद को मिस नहीं किया जितना अब कर रही हूँ। हाय मेरी नींद !!

इस गुलाबी ठण्ड में फूलों की अलग ही रौनक होती है। फूलों को देख कर मन ताज़ा हो जाता है, ऐसे ही कुछ फूल मेरे घर के बहार खिले हैं –
सोचती हूँ एक कप चाय बनाके पी लूँ इससे पहले की मेरी नन्ही जग जाए…

शाल :: रेवा

कभी कभी विषयी चीज़ों से हमारी कितनी गहरी भावनाएं जुड़ जाती हैं। आश्चर्य होता है बाद में सोच कर लेकिन मन मानता नहीं की उन भावनाओं को त्याग दे। ऐसे ही कुछ भावनाएं मेरे बनाये हुए इस छोटे से शाल से जुड़ गयी हैं और जब भी इससे देखती हूँ या हाथ में लेती हूँ तो मन सिहर उठता है। ये रेवा का सबसे पहला शाल है। जब रेवा अस्पताल में थी तब मैंने उसके लिए बनाया था। जब भी मैं उससे मिलने जाती थी और उससे गोदी में लेती थी तो ये ही शाल उससे उठाती थी।



मैं वो ३० दिन कभी नहीं भूल सकती, जो मेरे जीवन के सबसे लम्बे दिन थे। हर एक पल भारी लगता था, और दिल एक दम सहमा सा रहता था। जब भी मैं अस्पताल जाने के लिए कार में बैठती थी तो अपने आप को तैयार रखती थी की आज नर्स न जाने क्या बता दे। भगवान से प्रार्थना करने में डर लगता था, पर अब करती हूँ की वो पल किसी माँ को न दिखाए जब उसका अंश उससे अलग एक डब्बे में बंद, तारो में लिपटा हुआ, नन्हे हाथों में IV लगी हो, खाने की नाली कभी मुंह से तो कभी नाक से जाती हो। हमने कुछ अच्छे कर्म ही किये होंगे जो इतना कुछ हम-दोनों ने अकेले काट लिया और रेवा भी सकुशल घर आ गयी। रेवा को देखती हूँ तो भगवन को धन्यवाद करती हूँ की उसने मेरी बेटी को सही-सलामत रखा बस थोड़ा जल्दी भेज दिया हमसे मिलाने के लिए 🙂

Comfort Food – इस वाक्य का हिंदी अनुवाद क्या होगा ?

२ साल से में Food Network Channel देख रही हूँ। ऐसा कह सकते हैं की शायद टीवी में मैं सबसे ज्यादा ये ही चैनल देखती हूँ। मैंने इस चैनल से बहुत कुछ सीखा है – खाने के तरीके, खाना बनाने के तरीके, खाना परोसने के तरीके, खाना वर्णन करने के तरीके। एक शब्द ने मुझे बहुत आकर्षित किया वो है – Comfort Food
Comfort Food एक तरह से सरल और आसान खान है जैसे हमारे खान में दलिया, खिचड़ी, दाल-चावल आदि हैं।
मैं आप सब से अनुरोध करुँगी की इस वाक्य का कोई अच्छा सा हिंदी अनुवाद सुझाएँ।
“सरल-खान” कैसा रहेगा ?

दलिया… मेरे घर में दलिया सबको अच्छा तो लगता है लेकिन उतने मन से नहीं खाया जाता। बचपन में मेरी माँ ने १-२ बार दलिया का सीरा बनाया था जो मुझे बहुत अच्छा लगा था।लेकिन मुझे बिलकुल भी मालूम नहीं की उन्होंने वो कैसे बनाया था। फिर आज मैंने तय किया की एक बार दलियासीरा बनाने की कोशिश तो करू। तो पेश है दलिया सीरा-


विश्वास कीजिये २० मिनट में सीरा तैयार हो गया। तो अगर किसी दिन आपका दूध-दलिया खाने की इच्छा नहीं करे तो सीरा खा सकते हैं। मैं आपको इसकी विधि बताती हूँ –
* मैंने १/२ कप दलिया को १ छोटा चम्मच घी में भुना। हल्का भूरा होने तक भुने
* दलिया के भूरा होने के साथ साथ ही उसमें कीसा हुआ नारियल ड़ाल दीजिये। हमें नारियल को हल्का सा भूरा होने देना है जिसे की सीरे में नारियल की स्वाद और महक आ जाए
* अपने स्वाद-अनुसार उसमें गुड या brown sugar डाले, आप चाहें तो शक्कर/चीनी भी ड़ाल सकते हैं, मीठा ड़ाल कर थोडा भुन ले
* मैंने दलिया से ८ गुना पानी डाला था क्यूंकि मैंने मोटा दलिया इस्तमाल किया था, आप अपने दलिया के हिसाब से पानी डालिए
* दलिया को ढक कर पकाएं
* दलिया पक कर नरम हो जाए और पानी उड़ जाये तब जानिये की सीरा तैयार है। आप चाहें तो सीरा को हल्का गीला भी रख सकते हैं।

अगर आप सीरा बनाये तो मुझे ज़रूर बतायेगा की कैसा लगा।

एक सुहाना दिन


फरवरी के लिए कैलेंडर बदल गए हैं कल San Jose में कई दिनों बाद धुप निकली। फिर क्या था मैं और रेवा निकल लिए घुमने। रेवा पुरे रास्ते चकर-पकर देखती रही। पहली बार इतनी देर तक धुप में घूमी 🙂
मेरे सास-ससुर भी भारत वापस चले गए तो अब घर में खाली खाली लगने लगा है। अब मैं और रेवा ही एक दुसरे से बात कर लेते हैं। कल रेवा की मालिश करते समय उसका तिल देखा, आखिर भगवान् ने उसे निशान दे ही दिया। मैंने बहुत दिनों से ठुण्ड रही थी और फिर कल दिखा रेवा अब थोड़ा पलटने की कोशिश करती है, इंतज़ार मैं हूँ की कब मेरा बच्चा ठुमक ठुमक चलेगा।

आजकल मुझे क्रोचिये से प्यार हो गया, बस हर समय इन्टरनेट पर क्रोचेत के बारे में ही पढ़ती रहती हूँ और कुछ न कुछ बनाने की कोशिश करती हूँ। रेवा की लिए ये टोपी बनायीं है –

अब थोड़ा समय मिला है तो अब अपनी क्रोचेत की नयी किताब पढना शुरू करती हूँ।
आशा करती हूँ की आपका दिन भी सुहाना हो !!