हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली

अमेरिका में रहते हुए और स्वयं के अनुभव से ऐसे कई प्रणालियाँ हैं जिनका भारत की प्रणालियों से कोई तुलना ही नहीं है। एक प्रणाली के बारे में आप सब के साथ ज़रूर चर्चा करना चाहूंगी – स्वास्थ्य सेवा सम्बन्धी

भारत में डॉक्टरों की कमी नहीं है बल्कि भारतीय डॉक्टर अपनी काबिलियत की वजह से दुनिया भर में मशहूर हैं तो फिर भारत में हम उनपर क्यों नहीं विश्वास करते ? क्यों हम उनकी सलाहों को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकल देते हैं या फिर ये कह कर हवा में उड़ा देते हैं की “इसे सिर्फ़ अपनी फीस से मतलब है” ? इसका कारन हमारी सोच नहीं ये पुरी प्रणाली है।

मैंने रेवा को अपने गर्भ के ठीक सातवें महीने में जन्म दिया। मुझे ‘Pre-eclamsia’ हो गया था जो की रक्त-चाप संभंधित बीमारी है। जिस तरह से मेरा और रेवा का इलाज यहाँ हुआ हमें रत्ति भर की परेशानी नहीं हुई और न हमने इतनी मुश्किल घड़ी में अपने परिवार की कमी महसूस की। हम हमेशा ये ही सोचते हैं की हम भारत में होते तो हम इतना कुछ क्या अकेले संभाल पाते ? न ये पता होता की डॉक्टर क्या कर रहा है और न उसपर विश्वास होता कि वो जो कुछ करेगा वो सही होगा कि नहीं।

साधारणतः मैंने जो सबसे बड़ा अन्तर भारत में देखा है वो हैं संचार का। न डॉक्टर समस्या को समझाने की चेष्टा करता है और न मरीज़ पूछने। डॉक्टर न तो मरीज़ को उसकी बिमारी के बारे में खुल के बताता है, न दवायों के side effects , उनका blood test क्यों लिया जा रहा है। कोई जानकारी नहीं। पता नहीं क्यों हमारे समाज में अधिकतर ऐसा मानना है की डॉक्टर भगवान् है। ज्यादातर लोग डरे सहमे से रहते हैं। जो डॉक्टर ने कहा उससे सर हिला कर मान लिया।
मेरे पिताजी जो की दिल के मरीज़ हैं, उन्हें nose infection हो गया था। वो अपने डॉक्टर के पास चेकअप कराने गए। उन्हें हमने appointment के बावजूद २ घंटे इंतज़ार किया, जब बारी आई तब डॉक्टर ने पुरी बात सुने बिना और कुछ कहे बिना दवाई लिख भेज दिया। ५००/- फीस देने के बाद अगर इस तरह की सेवा मिले तो इससे क्या प्रभाव पड़ेगा ?
मुझे पता नहीं की भारत में डॉक्टर के लाइसेंस का क्या कनून है, लेकिन जो भी है आपत्तिजनक है। कहीं कोइ लगाम ही नहीं है। जिसका मन किया जहाँ मन किया वहा उसने अपना दवाखाना खोल लिया। और ये ही हाल फार्मसी का है।
हमारा जागरूक होना बहुत ज़रूरी है। हमारे चार सवाल डॉक्टर से पूछ लेने से हमारा ही भला होगा। जो भी आपके मन में दुविधाएं हैं, प्रश्न है उससे पूछिए। उसकी प्रष्टभूमि के बारे में पूछिए, उसने कहा से डिग्री ली है – ऐसे छोटे छोटे सवाल जो मायने रखते हैं। वो भी एक इंसान है न की भगवान्।

मैं चाहती हूँ की आप भी अपनी मंशा लिखके मुझे बताइए की आप इस प्रणाली के बारे में क्या सोचते हैं और इससे सुधारने के उपाय।

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2 thoughts on “हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली

  1. M VERMA

    सुन्दर आलेख. विचारोत्तेजक भी. वास्तव में यहाँ की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली यानि उसके वितरण में दोष है.

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  2. निर्मला कपिला

    रिचा जी आपने बिलकुल सही कहा। मेरी बेटी की डिलिवरी पर मैं वहां थी और उनका प्रबन्ध देख कर हैरान थी। मैं खुद एक फार्मासिस्ट हूँ 37 साल से अधिक अस्पतालों मे नौकरी की है मगर हमारी व्यवस्था को भ्य्रष्टाचार और नेताओं ने खा लिया है। इस लिये किसी भी सुधार की आशा व्यर्थ है। यहाँ तो दिन पर दिन प्राईवेट अस्पताल खुल रहे हैं जो केवल लूटने के लिये दुकाने हैं । लेकिन वहाँ एक बात मुझे अच्छी नहीं लगी कि अगर आपको कोई भी तकलीफ है तो डा से समय लेना पडता है लोई आपके पास कुछ दिन के लिये आया है बीमार हो जाता है तो इलाज मे आपका तो दिवाला निकल जाता है। ये सही है कि वहाँ के नागरिकों या जो कम्पनी की तरफ से जाते हैं उनके लिये वहाँ बहुत अच्छा है। उनकी हर चिकित्सा मुकम्मल है। भारत मे तो पता नहीं अभी 50 साल और लग जायेंगे उन तक पहुँचते। धन्यवाद और शुभकामनायें

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