Monthly Archives: December 2009

क्या आपके यहाँ आये Santa Claus ??

आज मैंने Google पर यह वेबसाइट देखी जहाँ Santa Claus को पथ देखा जा सकता है। यहाँ क्लिक करिए।
आप वहां Santa Claus की विडियो देख सकते जिसमें आप देख सकेंगे की वो कैसे जगह जगह तौफे बाँट रहे हैं। आपको यह भी पता चलेगा की कहाँ कहाँ तौफे बाते जा चुके हैं। कमाल है !!

आप सभी को Merry Christmas !!

हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली

अमेरिका में रहते हुए और स्वयं के अनुभव से ऐसे कई प्रणालियाँ हैं जिनका भारत की प्रणालियों से कोई तुलना ही नहीं है। एक प्रणाली के बारे में आप सब के साथ ज़रूर चर्चा करना चाहूंगी – स्वास्थ्य सेवा सम्बन्धी

भारत में डॉक्टरों की कमी नहीं है बल्कि भारतीय डॉक्टर अपनी काबिलियत की वजह से दुनिया भर में मशहूर हैं तो फिर भारत में हम उनपर क्यों नहीं विश्वास करते ? क्यों हम उनकी सलाहों को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकल देते हैं या फिर ये कह कर हवा में उड़ा देते हैं की “इसे सिर्फ़ अपनी फीस से मतलब है” ? इसका कारन हमारी सोच नहीं ये पुरी प्रणाली है।

मैंने रेवा को अपने गर्भ के ठीक सातवें महीने में जन्म दिया। मुझे ‘Pre-eclamsia’ हो गया था जो की रक्त-चाप संभंधित बीमारी है। जिस तरह से मेरा और रेवा का इलाज यहाँ हुआ हमें रत्ति भर की परेशानी नहीं हुई और न हमने इतनी मुश्किल घड़ी में अपने परिवार की कमी महसूस की। हम हमेशा ये ही सोचते हैं की हम भारत में होते तो हम इतना कुछ क्या अकेले संभाल पाते ? न ये पता होता की डॉक्टर क्या कर रहा है और न उसपर विश्वास होता कि वो जो कुछ करेगा वो सही होगा कि नहीं।

साधारणतः मैंने जो सबसे बड़ा अन्तर भारत में देखा है वो हैं संचार का। न डॉक्टर समस्या को समझाने की चेष्टा करता है और न मरीज़ पूछने। डॉक्टर न तो मरीज़ को उसकी बिमारी के बारे में खुल के बताता है, न दवायों के side effects , उनका blood test क्यों लिया जा रहा है। कोई जानकारी नहीं। पता नहीं क्यों हमारे समाज में अधिकतर ऐसा मानना है की डॉक्टर भगवान् है। ज्यादातर लोग डरे सहमे से रहते हैं। जो डॉक्टर ने कहा उससे सर हिला कर मान लिया।
मेरे पिताजी जो की दिल के मरीज़ हैं, उन्हें nose infection हो गया था। वो अपने डॉक्टर के पास चेकअप कराने गए। उन्हें हमने appointment के बावजूद २ घंटे इंतज़ार किया, जब बारी आई तब डॉक्टर ने पुरी बात सुने बिना और कुछ कहे बिना दवाई लिख भेज दिया। ५००/- फीस देने के बाद अगर इस तरह की सेवा मिले तो इससे क्या प्रभाव पड़ेगा ?
मुझे पता नहीं की भारत में डॉक्टर के लाइसेंस का क्या कनून है, लेकिन जो भी है आपत्तिजनक है। कहीं कोइ लगाम ही नहीं है। जिसका मन किया जहाँ मन किया वहा उसने अपना दवाखाना खोल लिया। और ये ही हाल फार्मसी का है।
हमारा जागरूक होना बहुत ज़रूरी है। हमारे चार सवाल डॉक्टर से पूछ लेने से हमारा ही भला होगा। जो भी आपके मन में दुविधाएं हैं, प्रश्न है उससे पूछिए। उसकी प्रष्टभूमि के बारे में पूछिए, उसने कहा से डिग्री ली है – ऐसे छोटे छोटे सवाल जो मायने रखते हैं। वो भी एक इंसान है न की भगवान्।

मैं चाहती हूँ की आप भी अपनी मंशा लिखके मुझे बताइए की आप इस प्रणाली के बारे में क्या सोचते हैं और इससे सुधारने के उपाय।

सीरियल कैसे कैसे !!

मैं एक भी हिंदी सीरियल नहीं देखती, मुझे सीरियल से बहुत चिड है। और अगर वो सीरियल एकता कपूर का हो तो टीवी फोड़ने की इच्छा होती है। मेरी सासु माँ धारावाहिक देखती हैं और उनके समय काटने के लिए हम लोगो ने हिंदी channels लगवाए। पता नहीं कितने दिनों बाद मैंने हिंदी channels देखे होंगे।
हे भगवान् !! क्या देख रहे हैं हम मनोरंजन के नाम पर। भारी भारी सारियां पहनकर घर के बहुएं साजिश के अलावा कुछ नहीं करती। कोई अपने पति की दूसरी शादी करवा रही है, कोई इतना सच्ची है की अपने बहन के पति को बचाने के लिए झूठ नहीं बोल सकती, कहीं शादी करने के लिए मंच का सहारा लेना पड़ रहा है, संगीत प्रतियोगिता को कहीं कहीं एक दम ढोंग बना दिया है।
क्यों इतनी चमक दमक है, कोई सरलता क्यों नहीं है। क्या साधारण सी सारी पहनकर कोई धारावाहिक नहीं बन सकता ? क्या संगीत समारोह बिना तामझाम के नहीं हो सकते ? बड़ा दुख होता है ये देख कर की हम इतना संचार और पैसा फालतू दिखावे में बर्बाद कर रहे हैं।
आप मुझे बताइए की आपको कौनसा सीरियल पसंद है और क्यों ??

मुझे फिर देर हो गयी लिखने में –

आज २ महीने से ऊपर हो गए मुझे ब्लॉग पर कुछ लिखे हुए, क्या करू समय ही नहीं मिला। रेवा के साथ दिन और रात का पता ही नहीं चलता। और फिर मेरे सास-ससुर जी आये हुए हैं भारत से तो वक़्त कहा उड़ जाता है नहीं मालूम। करीब २ साल बाद हमारा परिवार इक्कठा हुआ है। बड़ा आनंद है घर में।
रेवा भी अब बड़ी हो रही है। अब उसके उठने का समय बढ़ गया है। अब रोशनी पहचानने लगी है। गागा-गीगी करती हैं, अपने आप खेलने लगती है। लोरियां, गाने सुनती है, विशाल जब गिटार बजाते हैं तो ध्यान से सुनती है। देख के बड़ी ख़ुशी होती है, अब मेरा मुन्ना बड़ा हो रहा है :))
विशाल ने नया digital SLR लिया है। Nikon d5000. कुछ तस्वीर –