Monthly Archives: August 2009

शिक्षा और जल कि समस्या

पिछले हफ्ते कि २ मुख्य खबरों ने मुझे इनके बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया, वो हैं –

अनिवार्य शिक्षा विधेयक
आज़ादी के ६२ सालों के बाद उठे इस कदम को मैं कहूँगी – देर आयद दुरस्त आयद! भारतीय संसद ने ६-१४ साल के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए विधेयक पारित कर दिया है। मेरे चाचाजी सरकार द्वारा चालित आदिवासी स्कूल के हेडमास्टर हैं। वो मुझे बताते थे की कैसे उन्हें मशक्कत करनी पड़ती है बच्चों को स्कूल में बुलाने के लिए। माता पिता बच्चों को घर पर बिठा लेंगे लेकिन स्कूल नहीं भेजेंगे, क्यूंकि उनके पास महीने का घर का खर्चा चलने के लिए १०/- नहीं हैं तो बच्चे को कैसे स्कूल भेजें । और अगर कोई १-२ बच्चे आ भी गए एक दिन क्लास में तो दुसरे दिन गायब। चाचा बताते हैं की गरीबी इतनी है की उन्हें ज़बरदस्ती करने में भी शर्म आती है। कोई अगर होनहार बच्चा है तो उसकी फीस चाचा ही भर देते थे। कुछ ऐसे भी माता पिता हैं की जिन्हें समझ ही नहीं मालूम की उनका बच्चा पढ़ कर क्या करेगा।
इस विधेयेक ने ज़रूर उन माता पिता की फीस की चिंता तो ज़रूर ख़तम कर दी है जो चाह कर भी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे थे। पर हमेशा की तरह सरकार के लिए हमारे सवाल खड़े हैं –

  • सिर्फ़ १४ साल तक ही क्यों मुफ्त शिक्षा ? अगर उसे बढ़ाकर १६ कर देते तो बचचों को १०वी तो पुरी हो जाती।
  • सिर्फ़ शिक्षा मुफ्त कर देने से हमारी जिम्मेदारियां खत्म हो जाती हैं ? कौन भेजेगा स्कूल जहाँ दीवारें भी सधी खड़ी नहीं है, बैठने और लिखने के लिए कुर्सी टेबल तो छोडिये एक दरी भी नहीं है, शौचालय नहीं……
  • पर्याप्त शिक्षक लाने के लिए क्या योजना है ? अब जहाँ १ शिक्षक के नीचे कहीं कहीं राज्य में १०० बच्चे हैं तो अब क्या २०० होंगे ??

ऐसे कई सवालों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया की शिक्षा स्तर पर हम जहाँ थे क्या अब भी वहीँ रहेंगे ?

भारत में सूखे का प्रकोप
इस साल बारिश ने फिर निराश कर दिया और अब धीरे धीरे हमें अनचाही खबरें सुनाई दे रही हैं। आने वाले समय में होने वाली पानी कि कमी। फसल का बुरी तरह से प्रभावित होना। कई राज्य सुखा ग्रस्त घोषित हो गए हैं।
पर इस जल-संकट का कारण सिर्फ़ बारिश है ?? हम इस बार मानसून और सरकार पर दोष देकर इस समस्या से पल्ला नहीं झाड़ सकते। सही मानिये हमने अपने जल स्त्रोतों का कभी आदर ही नहीं किया। शहरों में तो बुरा हाल है, जहाँ चाहा जैसे चाहा पानी खर्च किया। जब तक नल आ रहे हैं पानी खर्च करो, बस चले तो पुरा घर धो डालो। हमारी आँखें तभी खुलेंगी जब हमें पानी कि हर बूँद का मोल देना पड़ेगा। और ऐसा कुछ हिसाब कृषि का है । विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 30 साल में ऐसी फ़सलों की खेती अधिक हो रही है, जिन्हें पानी की अधिक आवश्यकता होती है। पहले पंजाब में धान की खेती नहीं होती थी क्योंकि वहाँ प्राकृतिक रूप से धान के लिए पानी नहीं था। धान के लिए बिहार, बंगाल और उड़ीसा जैसे इलाक़े थे, लेकिन इसके बावजूद किसानों ने धान की खेती की जिसका अब नुक़सान हो रहा है।
हमें जागना होगा, हमें जल का आदर करना सीखना ही होगा। हम कब एहसास करेंगे कि पानी कि एक एक बूंद अनमोल है। देश में सबसे कम बारिश रेगिस्तानी इलाक़े जैसलमेर में होती है। इस साल वहाँ अब तक सिर्फ़ तीन सेंटीमीटर बारिश हुई है लेकिन फिर भी वहाँ तालाब लबालब भरे हुए हैं। जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी शहर जब कम पानी के साथ फल-फूल सकते हैं तो भारत के अन्य शहर ऐसा क्यों नहीं कर सकते।

जल कि बात करके मुझे Indian Ocean के इस मधुर गीत ‘माँ रेवा’ कि याद आगई जिसमें नर्मदाजी का आवाहन किया गया है –

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क्रोचिया और ग़ज़ल

आजकल मैं क्रोचिये से अपना समय काट रही हूँ, और सही मानिये मेरा दिल आ गया है। हालाँकि मैंने उतना कुछ बनाया नहीं है लेकिन जितना बनाया है उससे दिल खुश हो गया है और चाहती हूँ इसको और आगे बढाओं। देखिये कितना हो पाता है। आप भी देखिये और बताइए कैसा लगा 🙂

शादी से पहले मैं ग़ज़ल साल में १-२ बार सुनती थी और अब हमारे घर में आप कभी भी सुनेंगे तो आपको या तो ग़ज़ल या फिर कव्वाली सुनाई देगी 🙂 ऐसा कुछ नहीं हुआ मेरे साथ जिसे मुझे इन दोनों शैलियों को सुनने पर मजबूर कर दिया गया है। मेरे शौहर को संगीत का बहुत शौक है और वो ख़ुद भी गाते और बजाते हैं। सबसे अच्छी बात जो मुझे लगी है की उनके साथ मैंने दुनिया की हर शैली के संगीत को सुनने का मौका मिला है – पाश्चातीय, ग़ज़ल, कव्वाली, शास्त्रीय, आदि। लेकिन आजकल हमारे ipod में ग़ज़ल और कव्वाली की संख्या इतनी होगयी है की shuffle on होने पर भी हर दूसरा गाना या तो ग़ज़ल है या कव्वाली। चलिए इस बहाने मेरी उर्दू साफ होगी।

आप भी सुनिए जगजीत कौर की एक खुबसूरत ग़ज़ल, और कव्वाली अगले पोस्ट में।

You’re Beautiful

मैं आज काफी समय बाद अपने ब्लॉग पर कुछ लिखने आई हूँ। अचानक से लिखने की इच्छा नहीं हुई, ऐसा क्यों हुआ मुझे पता नहीं। पर आज मैं जब अपने गानों की playlist सुन रही थी और James Blunt का गाना You’re Beautiful आया तो मुझे अचानक से ब्लॉग की याद आई। और बस लिखने का मन हो गया :-))

आप सबके लिए “You’re Beautiful” और मैं अब ब्लॉग पर वापस आने की खुशी मनाती हूँ।