Monthly Archives: February 2009

छोटी सी उपलब्धि…

जब एक काम-काजी महिल अचानक से घर पर बैठ जाए तो समय उससे काटने को दौड़ता है। ऐसा कुछ मेरे साथ भी हुआ, समय काटे नही कटता था पर अब मैंने समय अपने हाथ मैं ले लिया है।
पिछले हफ्ते मैंने अपना पहला क्रोचिया afghan बनाया।

समय काटने के लिए पास के ही एक Community College में Baking Classes join की हैं। सबसे पहली क्लास में हमें ब्रेड बनाना सिखाया। बड़ा मज़ा आया और ब्रेड भी अच्छी बन गई। ये रही मेरी फ्रेंच ब्रेड :-))

Advertisements

Valentine’s Day – क्या प्यार का इज़हार करना कोई गुनाह है ??? –

Valentine’s Day हमारे देश मैं इस तरह से याद किया जाता है :

http://ibnlive.in.com/news/indias-shame-incidents-of-hatred-on-vday/85366-3.html

http://www.belfasttelegraph.co.uk/breaking-news/world/asia/six-arrested-in-valentines-day-protests-14188756.html

क्या प्यार का इज़हार करना इतना ग़लत है ?? हमारी सरकार या वो संस्थाएं हो जो इस दिन का बहिष्कार करती हैं, तब क्या सो रही थी जब ये चलन बड़ी बड़ी multinational companies अपने उत्पाद बेचने का सहारा ले रही थी। तब क्यों स्वीकृति दे दी, तब याद नहीं आई संस्कृति और अब दोष देते हैं युवा पीढ़ी को। क्यों इतनी खिलाफत, इतनी नफरत, क्या प्यार इतना गन्दा होता है ??

साल में एक दिन आता है जब आप खुल के अपने प्यार का इज़हार करते हैं ?? और प्यार क्या सिर्फ़ युवा के लिए है ?? इस दिन में ऐसी क्या शर्मिंदगी है ?? क्यों आज भी हमारे बड़े प्यार को घृणा से देखते हैं ??क्यों परिवारों में प्यार के बारे में बच्चों से खुल के बात नहीं की जाती और जब होती है तो उससे गन्दा और भद्दा बता दिया जाता है ??

अच्छा मुझे बताइए, आपने कब अपनी पत्नी को कहा की आप उससे प्यार करते हैं और आप उससे अपने जीवन में आने के लिए धन्यवाद करते हैं। आपने कब अपने पति से कहा की आप उनसे बेहद प्यार करती हैं और उन्होंने कभी भी कोई को कमी नहीं होने दी। आपने कब अपने बच्चों को प्यार से गले लगाया और भगवान् को धन्यवाद किया की आप कितने आभारी हैं अनमोल रत्नों को पाकर। कब आपने अपने माता-पिता को प्यार से गले लगाया हो और उन्हें धन्यवाद किया हो उन हर बलिदानों का जो उन्होंने आपके लिए की। क्यों नहीं हम ये दिन परिवार के साथ मनाये और सुहानी यादें बनाएं। साल का एक दिन परिवार के लिए।

अगर फिर भी आपको तकलीफ है इस दिन से तो अपने बच्चों से बात कीजिये न की पाश्चात्य संस्कृति पर दोष लगाइए। अगर आपको लगता है की फिर हमारी युवा पीढ़ी ग़लत सभ्यता अपना रही है तो उन्हें समझाएं न की उन्हें कोसें, उनसे बात करें, उनकी बात समझे और अपनी बात को समझाएं। इस तरह से व्यवहार करके हम क्या साबित करना चाह रहे हैं ?? प्यार बढ़ाइये न की नफरत।

"Dad ! Why God send us here ??"


मैं और विशाल हमारा मनपसंद टीवी धारावाहिक “Everybody Loves Raymond” देख रहे थे, उसमें एक बहुत अच्छा एपिसोड है जिसमें Raymond की बेटी उससे पूछती है “Dad! Why God send us here ?”

मैंने आजतक इस सवाल के बारे मैं नहीं सोचा पर फिर ख्याल आया अगर कल को मेरी बेटी/बेटे ने पुछा फिर ? मुझे उसको कुछ तो बताना होगा, मैं Raymond की तरह छींकना शुरू नहीं कर सकती। इसलिए मैंने एक चोटी सी कहानी बनाई है

भगवान जब भी सोचते थे उनके विचारों से आत्मा निकलती थी, अगर भगवान् नटखट सोचते थे तो एक नटखट आत्मा, पढ़ाई के विचार तो एक विद्वान आत्मा, खेल के विचार तो एक खिलाड़ी आत्मा……
हर एक विचार से एक आत्मा, और जब भगवान् ने आँख खोली पाया उनका स्वर्ग आत्माओं से भर गया है और कहीं कोई जगह नहीं है। भगवान् ने सोचा ऐसा कुछ करना पड़ेगा की जिनसे ये आत्माएँ कहीं व्यस्त हो जाएँ। उन्होंने फिर धरती बनाई, फिर उन्होंने हर एक चीज़ बनाईइंसान, जल, हवा, आग, पेड़, पौधे, जीवजंतु..आदिइत्यादि और फिर भगवान् ने हर आत्मा को उन के पीछे कर दिया जिससे की वो उनका ध्यान रख सके। अब भगवान् की जगह आत्मा जिम्मेदार होंगी उनके आचरण के लिए। जो सबसे अच्छा पालन करेगा उसे स्वर्ग में स्थान मिलेगा नहीं तो नरक में फिर से प्रशिक्षण ले कर वापस धरती पर जाएगा और पुनः उतरदायित्व संभालेगा।
इस क्रियाका नाम है जीवन।

अगर आपके पास कोई और वर्णन है तो ज़रूर बताइएआपके विचारों का स्वागत है।

Driving down on US-101

This video contains glimpse of California’s famous freeway US-101. Video is shot by Vishal and edited by me :)), my first hand on editing. Thanks to my hubby who inspired me for editing and believe me its a big fun.