Slumdog Millionaire

आजकल फ़िल्म Slumdog-Millionaire चर्चा मैं है। इस साल फ़िल्म ने कई अवार्ड जीतें हैं। गोल्डन ग्लोब अवार्ड, क्र्टिक अवार्ड और उम्मीद की जा रही है की ऑस्कर मैं भी ये फ़िल्म खूब धूम मचाएगी । ये एक ब्रितानी फ़िल्म है जो मुंबई पृष्ठभूमि पर बनी है । कहानी का आधार विकास स्वरुप की पुस्तक Q and A है। कौन बनेगा करोरपति जैसे कार्यकम के जरिये झुग्गियों में रहने वाले एक युवक के कारोरपति बनने की कहानी की पीछे मुंबई की सबसे बड़े झुग्गियों और बस्तियों की तस्वीर है। मैंने भी ये फ़िल्म देखी और मुझे भी सभी लोगों के तरह बहुत अच्छी लगी। इतने अवार्ड जीतने के बाद हर ख़बर मैं इसी फ़िल्म की चर्चा है। कोई भी चैनल देखिये कहीं न कहीं – कोई न कोई फ़िल्म के बारे मैं कह रहा है।
फ़िल्म को देख कर मेरा मन अभी तक विचिलित है । उन झुग्गियों और बस्तियों को देख कर, वहां गुजर बसर कर रहे लोगों की ज़िन्दगी देख कर मेरा ह्रदय व्याकुल हो गया है। ये भी ज़िन्दगी है ??

धारावी – मुंबई मैं बसा और एशिया का सबसे बड़ा झुग्गी इलाका, कहा जाता है वहां करीब ६० लाख लोग रहते हैं ।

क्या आपको पता है इन झुग्गियों ने मुंबई की सिर्फ़ ६% ज़मीन को घेरा हुआ है लेकिन इनमें मुंबई की करीब ६०% जनसँख्या है। यहाँ पीने का पानी नहीं है, बिजली नहीं है, और कोई भी मूल सुविधाएँ नहीं है। जहाँ नज़र उठाईये गन्दगी और मल के अलावा कुछ नहीं दिखेगा। छोटे छोटे बच्चे कचरा उठाते हुए, गंदे पानी मैं खेलते हुए दिखाई देंगे। क्या ये बच्चे, ये इंसान इस ज़िन्दगी के अधिकारी हैं ? क्या किसी भी को भी इस तरह ज़िन्दगी जीने का अधिकार है ? सुविधायों के अलावा और जो परेशानी है वो हैमाफिया“, यहाँ सिर्फ़ राज है तो माफिया का सरकार नहीं। पर धारावी निवासियों के उत्साह की दात देनी चाइये की जिस उत्साह से अपनी ज़िन्दगी गुजर बसर कर रहे हैं।
मैं जब फ़िल्म देख कर निकल रही तो मेरे अंतर्मन के किसी कोने में शर्म थी और लग रहा था शायद मैं भी किसी तरह से जिम्मेदार हूँ । मुंबई भारत के महानगरों में आता है और एशिया में टोक्यो के बाद। और फिर भी शहर के इतनी बड़ी आबादी झुग्गियों में रह रही है। क्या भारत सरकार को अहसास नहीं या हर बार की भाँती आँखें बंद कर के बैठी है। पुरी दुनिया ने फ़िल्म के ज़रिये हमारे देश की एक अहम समस्या को देखा और माना की इस तरह गुजरबसर करना मानवाधिकारों के खिलाफ है लेकिन हमारी सरकार की ये बात इतनी ज़रूरी नहीं ।
लेकिन क्या ये सिर्फ़ सरकार की जिम्मेदारी है हमारी नहीं ? मैंने मुंबई में करीब १-२ साल बिताएं लेकिन मैंने तो सहायता नहीं की – ये मेरी गलती नहीं ? वहां रह रहे लोगों की जिम्मेदारी नहीं ?
ये सिर्फ़ धारावी में रह रहे लोगों की या सरकार की नहीं बल्कि सभी भारतवासियों की जिम्मेदारी है। सिर्फ़ फ़िल्म देख कर और उसपर अपनी भावनाएं दिखने के अलावा सहयोग भी देना ज़रूरी है।
मैंने निर्णय लिया है की ये मेरी भी जिम्मेदारी है की मैं अपने समाज के उन वर्गों की सहायता करु जिन्हें मदद की ज़रूरत है, क्या आपने निर्णय लिया??

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s