नव वर्ष २००९

नए साल की आप सबको ढेर सारी शुभकामनाएं। आज मेरा मन कुछ कवितायेँ पढ़ने का हुआ । गूगल पर देखा और कुछ महान
लेखकों की कवितायेँ मिली- सुमित्रा नंदन पन्त, महादेवी वर्मा, मैथली शरण गुप्त, हरिवंश राय बचन….
एक कविता मुझे बहुत अछी लगी, महादेवी वर्मा जी की लिखित है । इस कविता में महादेवी जी दीपक से अनुरोध कर रही हैं की वो उनका प्रेम पथ हमेशा आलोकित करता रहे –

मधुत मधुर मेरे दीपक जल !
युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,
प्रियतम का पथ आलोकित कर !

सौरभ फैला विपुल धुप बन,
मृदुल मोम सा धुल रे मृदु तनु;
दे प्रकाश का सिन्धु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु गल गल !
पुलक पुलक मेरे दीपक जल !

सरे शीतल कोमल नूतन,
मांग रहे तुझसे ज्वाला-कण
विश्व-शलभ सिर धुन कहता ‘ मैं
हाय न जल पाया तुझमें मिल ‘ !
सिहर सिहर मेरे दीपक जल !

जलते नभ मैं देख असंख्यक,
स्नेहहीन नित कितने दीपक ;
जलमय सागर सा उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल !
विहंस विहंस मेरे दीपक जल !

दुम के अंग हरित कोमलतम,
ज्वाल को करते हृदयंगम ;
वसुधा के जड़ अन्तर में भी,
बंदी है तापों की हलचल !
बिखर बिखर मेरे दीपक जल !

मेरे निश्वासों से दुततर,
सुभग न तू भुझने का भय कार ;
मैं अंचल की ओट किए हूँ,
अपनी म्रदु पालकों से चंचल !
सहज सहज मेरे दीपक जल !

सीमा ही लघुता का बंधन,
है अनादी तू मत घडियां गिन;
में द्रग के अक्षय कोशों से-
तुझ में भरती हूँ आंसू जाल !
सजल सजल मेरे दीपक जल !

तब असीम तेरे प्रकाश चिर,
खेलेंगे नव खेल निरंतर;
तम के अनु अनु में विद्युत सा –
अमित चित्र अंकित करता चल !
सरल सरल मेरे दीपक चल !

तू जल जल जितना होता क्षय,
या समीप आता छलनामय;
मधुर मधुर में मिट जाना तू –
उसकी उज्वल स्मित में घुल खिल !
मदिर मदिर मेरे दीपक जल !

प्रियतम का पथ आलोकित कर !!

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s